आजाद अधिकार सेना की ओर से सौपा गया हापुड़ डीएम को ज्ञापन
हापुड़ -आजाद अधिकार सेना की ओर से हम आपके समक्ष यह महत्वपूर्ण ज्ञापन प्रस्तुत कर रहे हैं। यह विषय केवल एक संत या एक संस्था से संबंधित नहीं है, बल्कि करोड़ों धर्मावलंबियों की आस्था, धार्मिक परंपराओं के सम्मान तथा सामाजिक न्याय से जुड़ा हुआ है।
*कुंभ/माघ मेला प्रकरण*
प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ एवं माघ मेले के दौरान यह आरोप सामने आए कि शंकराचार्य जी के रथ को रोका गया तथा संगम स्नान जैसे धार्मिक अनुष्ठान में उन्हें बाधाओं का सामना करना पड़ा। साथ ही प्रशासन द्वारा “शंकराचार्य” पदवी के उपयोग को लेकर भी आपत्ति व्यक्त की गई। यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है, क्योंकि ज्योतिषपीठ की स्थापना आदि गुरु Adi Shankaracharya द्वारा की गई थी और यह सनातन धर्म की प्रमुख परंपराओं में से एक है।
*POCSO अधिनियम के अंतर्गत दर्ज मुकदमा*
फरवरी 2026 में प्रयागराज की विशेष अदालत के आदेश पर झूंसी थाना क्षेत्र में शंकराचार्य जी तथा उनके एक शिष्य के विरुद्ध Protection of Children from Sexual Offences Act के अंतर्गत गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया गया है। स्वामी जी द्वारा इन आरोपों को पूर्णतः निराधार एवं षड्यंत्रपूर्ण बताया गया है।
*गौमाता को “राष्ट्रमाता” घोषित करने की मांग*
पूज्य शंकराचार्य जी लंबे समय से गौ-रक्षा और गौवंश संरक्षण के विषय में देशव्यापी जनजागरण अभियान चला रहे हैं। उन्होंने गौमाता को “राष्ट्रमाता” का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर व्यापक सामाजिक आंदोलन का आह्वान किया है।
*आजाद अधिकार सेना की मांगें*
1. प्रयागराज में कुंभ/माघ मेला प्रकरण में हुई घटनाओं की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जाँच कराई जाए।
2. शंकराचार्य जी के विरुद्ध दर्ज मुकदमे की स्वतंत्र एवं पारदर्शी जाँच सुनिश्चित की जाए।
3. जांच पूर्ण होने तक उनकी सुरक्षा एवं गरिमा का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
4. गौमाता को “राष्ट्रमाता” घोषित किए जाने के विषय पर केंद्र सरकार एवं संसद स्तर पर गंभीर विचार-विमर्श प्रारंभ किया जाए।
महोदया, यह विषय केवल धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक पहचान और करोड़ों नागरिकों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। यदि इन विषयों पर समय रहते निष्पक्ष एवं संवेदनशील हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो इससे समाज में असंतोष और अविश्वास की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
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